शनिवार, 24 सितंबर 2011

मीडिया स्कैन : भावी पत्रकारों का अखबार

-रवि टांक जनता को जागरूक करने और जनमत का निर्माण करने का महत्वपूर्ण कार्य लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ 'मीडिया' के द्वारा किया जाता है। परन्तु आज मीडिया का स्वरूप बदल चुका है और इसी बदलते स्वरूप के चलते जो पत्रकारिता कभी एक मिशन समझी जाती थी, आज वही एक बड़े व्यवसाय में तब्दील हो चुकी है जिसका प्राथमिक उद्देश्य अधिक से अधिक लाभ कमाना हो गया है। इस प्रवृत्ति से बुजुर्ग पत्रकार चिंतित हैं। लेकिन वे बहुत कुछ करने की स्थिति में नहीं हैं। ऐसे माहौल में पत्रकारिता की पढ़ाई कर रहे कुछ विद्यार्थियों ने अपने भावी पेशे को विशुध्द 'बाजारू' बनने से रोकने के लिए कुछ करने का मन बनाया। उन्होंने पत्रकारिता के छात्रों को मीडिया जगत की हकीकत बताने और साथ ही इसके सामाजिक सरोकारों के बारे में सचेत करने के लिए काफी विचार-विमर्श के बाद एक पहल की है। उनकी यह पहल है 'मीडिया स्कैन' नामक चार पृष्ठ वाला मासिक अखबार जिसके द्वारा वे अपनी बात पत्रकारिता के छात्रों तक पहुंचाते हैं। जुलाई 2007 से प्रकाशित होने वाला मीडिया स्कैन दिल्ली विश्वविद्यालय, भारतीय जनसंचार संस्थान, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, जामिया मिलिया इस्लामिया, भारतीय विद्या भवन आदि संस्थानों के छात्रों की मेहनत का परिणाम है। अखबार हाथ में आते ही उफपर दृष्टि जाती है जहां लिखा है - 'जुबान नरम, तासीर गरम'। इससे अखबार से जुड़े लोगों का तेवर साफ समझ में आ जाता है। मीडिया स्कैन का मूल्य रखा गया है सवा रुपया जो वास्तव में बाजार के नियमों का एक तरह से मजाक उड़ाता है। लाभ कमाने की बात अखबार से जुड़े छात्रों के दिमाग में दूर-दूर तक नहीं है। कोई स्पान्सर मिल जाए तो ठीक अन्यथा अपने पैसे लगाकर उन्होंने अखबार को चलाए रखने का निश्चय किया है। विज्ञापन लेने से उन्हें एतराज नहीं लेकिन अपनी शर्तों पर। विज्ञापन जुटाने के लिए अखबार निकालना उनका उद्देश्य नहीं है। छात्र जीवन की आर्थिक मुश्किलों के बीच उनका यह निश्चय हमें आज की युवा पीढ़ी के उस वर्ग से परिचय करवाता है जिसके लिए 'अर्थ' जरूरी है, लेकिन सब कुछ नहीं है। मीडिया स्कैन में भावी पत्रकारों के साथ-साथ प्रतिष्ठित पत्रकार भी विभिन्न विषयों पर लिखते हैं। छोटी सी अवधि में ही इस अखबार ने कई प्रतिष्ठित लोगों का धयान अपनी ओर खींचा है। प्रख्यात पर्यावरणविद अनुपम मिश्र के अनुसार पत्र का प्रकाशन सराहनीय है। भावी पत्रकारों का मानस निर्माण करने में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका हो सकती है। पत्रकारिता के कुछ जुझारू छात्रों द्वारा संचालित यह पत्र आज केवल दिल्ली में ही नहीं बल्कि विभिन्न प्रदेशों में भी छात्रों के माध्यम से ही पहुंच चुका है। इसके अतिरिक्त इसे इन्टरनेट पर ई-मेल के माध्यम से लगभग साढ़े तीन हजार लोगों तक पहुंचाया जा रहा है। शीघ्र ही इसकी वेबसाइट भी शुरू करने की योजना है। जिस प्रकार छात्रों एवं वरिष्ठ पत्रकारों के साथ-साथ समाज के गणमान्य लोगों ने इस प्रयास को सराहा है, उससे पत्र के संचालकों का आत्मविश्वास बढ़ा है। अपनी आगे की रणनीति को लेकर मीडिया स्कैन से जुड़े छात्र बहुत स्पष्ट हैं। वे इसे एक सहकारी उद्यम मानते हैं और चाहते हैं कि इस पत्र की पहचान एक ऐसे अखबार के रूप में बने जो मीडिया छात्रों द्वारा मीडिया छात्रों के लिए निकाला जा रहा है, लाभ कमाने के लिए नहीं बल्कि उन्हें यह बताने के लिए कि पत्रकारिता केवल आजीविका का साधन भर नहीं, बल्कि एक मिशन भी है। - भारतीय पक्ष में छपा

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें